Friday, October 19, 2018

कुछ नगमे

 -1-

प्यार तो तुझे हम खुद से भी ज्यादा करते है
लेकिन पता है के इस रिश्ते की कोई अहमियत नही
क्यो इस ज़िन्दगी को दांव पे लगाने चले है फिर
जब की तेरे ज़िन्दगी में आने की मुझे इज़ाज़त नही...




-2-
वक्त बीतता गया लम्हे बितते गए
हम तुम्हारी याद में तनहा बितते गए

समंदर के पानी को किनारे मिल गए
पर हम अपनी प्यास के सहारे जीते गए

चाँद ने अपनी चांदनी से बातें भी कर ली
हम दो लब्ज़ बोलने के लिए खुद को बेचते गए

ऐ वक़्त हमे थोड़ा वक्त दे खुद से
हम सांसे ले रहे है, वो ज़िन्दगी बनते गए




-3-

जो कभी हमारे होने को अपनी तकदीर मानते थे... आज न जाने क्यों हमे अपना वक़्त देने को फुरसत ढूंढते हैं

बड़ी बेकदर है ये दुनिया मेरे दोस्त... रोशनी आने के बाद चिरागों को बुझाने को अपनी जिम्मेदारी मानते हैं।

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